मीरा की ज़िंदगी में विक्रम का प्रवेश एक नए अध्याय का आरंभ था। जब भी समीर बिज़नेस ट्रिप्स पर जाता, मीरा की नजरें विक्रम की बालकनी पर टिकी रहतीं। विक्रम की आंखों में गहराई और बातों में जादू था, जो उसे अपनी ओर खींचता रहता। यह एक ऐसी जादुई खींचाव था जिसे वह महसूस तो कर रही थी, लेकिन उसे अपनी नैतिकता की सीमाओं को भी ध्यान में रखना था।
एक दिन, जब बारिश की बूँदें खिड़की पर टिककर एक संगीत की धुन बना रही थीं, मीरा ने विक्रम को अपने बालकनी में बैठकर चाय पीते देखा। उसने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है। वह अपने दिल की इच्छाओं को दबाए रखते हुए, अपने अंदर की हिम्मत इकट्ठा करती है और विक्रम के पास जाती है।

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