रात के ग्यारह बज चुके थे। तीन बेडरूम वाले उस आलीशान अपार्टमेंट में सन्नाटा इतना गहरा था कि ड्रॉइंग रूम में टंग-टंग करती घड़ी की सुई की आवाज़ भी किसी हथौड़े की तरह गूंज रही थी।
मीरा बालकनी की रेलिंग से टिककर खड़ी थी। हल्की ठंडी हवा उसके खुले बालों को छूकर गुज़र रही थी, लेकिन उसके मन के भीतर की तपन को बुझाने में पूरी तरह नाकाम थी। हाथों में थमा हुआ कॉफ़ी का मग अब पूरी तरह ठंडा पड़ चुका था—ठीक उसकी अपनी शादीशुदा जिंदगी की तरह।

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